आम आदमी को देखकर ऐसा लग रहा है की उसके सर पर काले बदल तो हैं . लेकिन वो उनके लिए पानी नही बरसा सकते सिवाय पानी को जमीन के नीचे से निकालने के खेर्चे को बढाने के . नेता लोग अपनी नेतागिरी में लगे हुए हैं कोई अपने घर को आगे बढाने में लगा है तो कोई अपने को साबित करने में लगा हिया की हम ये कर देंगे गरीबी दूर भागेगी . कहना तो वो ये भी चाहते हैं की के काले बादल पानी की जगह तेल ही उधेल देंगे . जमीनी स्तर पर कुछ भी न करने की कसम फिर भी अपने को जमीन से जुढ़े हुए नेता समझते हैं और बताते हैं .
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