Friday, December 13, 2013

दो नयनो कि आपसदारी

दो नयनो कि आपसदारी ,
कुछ लोगों ने दीन्ह बिगारी ,
कोई बोले नीर यहाँ था ,
कोई बोले पीर यहाँ था,
इतने में हो गयी लातमारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।
होत भोर जब बांग वो सुनते,
संध्या वंदन जब वो करते ,
चंदा संग भरते किलकारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।
रंग कुर्ते में भेद न करते ,
मन ही मन में खूब उछलते ,
एक दूजे के बने हितकारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।
शादी , उत्सव इन बिन सूना ,
विष्फोटक केर दें ये दूना ,
फिर क्यूँ फैली ये चिंगारी,
दो नयनो कि आपसदारी।
गावों में तो बनी बनी है ,
शहरो में तो गंध मची है ,
पढ़े लिखे हैं बने वैभिचारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।
अपना छोटा सा अभियान ,
सब ईशो को दें सम्मान ,
बन बैठो अपने अधिकारी ,
दो नयनो कि आपसदारी। 

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