Thursday, June 13, 2013
Wednesday, April 10, 2013
वो सब जानते हुए भी भोले बने रहते हैं , उन्हें अपने से जैसे कोई मतलब ही नही है , उन्हें आम जीवन पसंद है , वो दिल से जवां हैं जबकि उनके दाढ़ी के कुछ बाल पके हैं . जी हाँ हम बात कर रहे हैं लखनऊ यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के डॉ श्री मुकुल श्रीवास्तव सर की।
मेरे अकेडमिक सफ़र के सबसे अलग मास्टर जो वो सब करने को बोलते जो सब मना करते थे उनके मुताबिक आप टी . वी . सिनेमा फेसबुक और अख़बार पर जितना हो सके समय दे। पहले अटपटा बाद में मजा आने लगा। सवाल वो नही पूछते बल्कि सवाल करने की आज़ादी देते हैं और न पूछने पर बोर फील करते।
क्लास के हर एक स्टूडेंट पर उनकी पैनी निगाह तो रहती ही है साथ ही साथ उनका गजब का ऑब्जरवेशन जिनसे शायद ही किसी के बारे न जान गये हो और उनके एक्साम्प्ले क्लास की ही कहानी कहते है। बीच -२ में उनकी एक्टिंग , शायरी ,किसी फिल्म के गीत और dilouge उनकी बातो को पूरा करते हैं ज़िन्दगी से वो किसी भी बात को कनेक्ट करने का अद्भुत गुण है उनके पास जो किसी भी टॉपिक को जोड़ने का बढ़िया नजरिया है।
वो अपने को कभी क्लास में अज़ ए मास्टर नही पेश करते हैं और वो हर एक बात को सुन सकते हैं उनका दोस्ताना व्यहार बहुत ही कम्फर्ट कर देता हम सबको जिससे हमारी सोच में काफी बदलाव आया। उनकी कोई भी क्लास आजतक बोर नही कराती बढे ही रसिया मास्टर हैं वो अपने आप में जो ज्ञान नही देता है। कभी भी क्लास में वो चेयर पर नही बैठे एक डस्टर जो वो अपने साथ हमेशा रखते हैं . किसी भी चीज को लेकर उनके अंदर न तो उत्साह और न ही कोई चिंता पर हमेशा उनके दिमाग में कुछ न कुछ चलता रहता है . खुद को इन्टरनेट का लती मानते हैं . और सपने भी उलूल जुलूल देखने की बात करते भगवान् से हमेशा एंटी रहने की बात करते रहते हैं . क्लास में अपनी भी क्लास लगाया करते हैं नाराजगी का भाव कभी दिखा ही नही उनके चेहरे पर जो उनके व्यक्तित्व को और स्पेशल बनता है। उनके द्वारा गये आर्टिकल यूथ के साथ-२ हर वर्ग को रिप्रेजेंट करते हैं उनके अर्तिक्लेकी खास बात ये रहती है की फैक्ट और फिगर बढा ही जबरदस्त होता है।
इतना नाम और सम्मान होने के बावजूद उनकी जो खुद की छवि एक आम इंसान की तरह ही है न उन्हें दिखावा पसंद है और न ही उनमे कोई रौब दिखता है। अमिताभ से मिलने की तमन्ना है और उन्ही को वो अपना favourite एक्टर मानते हैं . यही है हमारे सर की कहानी ............
मेरे अकेडमिक सफ़र के सबसे अलग मास्टर जो वो सब करने को बोलते जो सब मना करते थे उनके मुताबिक आप टी . वी . सिनेमा फेसबुक और अख़बार पर जितना हो सके समय दे। पहले अटपटा बाद में मजा आने लगा। सवाल वो नही पूछते बल्कि सवाल करने की आज़ादी देते हैं और न पूछने पर बोर फील करते।
क्लास के हर एक स्टूडेंट पर उनकी पैनी निगाह तो रहती ही है साथ ही साथ उनका गजब का ऑब्जरवेशन जिनसे शायद ही किसी के बारे न जान गये हो और उनके एक्साम्प्ले क्लास की ही कहानी कहते है। बीच -२ में उनकी एक्टिंग , शायरी ,किसी फिल्म के गीत और dilouge उनकी बातो को पूरा करते हैं ज़िन्दगी से वो किसी भी बात को कनेक्ट करने का अद्भुत गुण है उनके पास जो किसी भी टॉपिक को जोड़ने का बढ़िया नजरिया है।
वो अपने को कभी क्लास में अज़ ए मास्टर नही पेश करते हैं और वो हर एक बात को सुन सकते हैं उनका दोस्ताना व्यहार बहुत ही कम्फर्ट कर देता हम सबको जिससे हमारी सोच में काफी बदलाव आया। उनकी कोई भी क्लास आजतक बोर नही कराती बढे ही रसिया मास्टर हैं वो अपने आप में जो ज्ञान नही देता है। कभी भी क्लास में वो चेयर पर नही बैठे एक डस्टर जो वो अपने साथ हमेशा रखते हैं . किसी भी चीज को लेकर उनके अंदर न तो उत्साह और न ही कोई चिंता पर हमेशा उनके दिमाग में कुछ न कुछ चलता रहता है . खुद को इन्टरनेट का लती मानते हैं . और सपने भी उलूल जुलूल देखने की बात करते भगवान् से हमेशा एंटी रहने की बात करते रहते हैं . क्लास में अपनी भी क्लास लगाया करते हैं नाराजगी का भाव कभी दिखा ही नही उनके चेहरे पर जो उनके व्यक्तित्व को और स्पेशल बनता है। उनके द्वारा गये आर्टिकल यूथ के साथ-२ हर वर्ग को रिप्रेजेंट करते हैं उनके अर्तिक्लेकी खास बात ये रहती है की फैक्ट और फिगर बढा ही जबरदस्त होता है।
इतना नाम और सम्मान होने के बावजूद उनकी जो खुद की छवि एक आम इंसान की तरह ही है न उन्हें दिखावा पसंद है और न ही उनमे कोई रौब दिखता है। अमिताभ से मिलने की तमन्ना है और उन्ही को वो अपना favourite एक्टर मानते हैं . यही है हमारे सर की कहानी ............
Tuesday, April 9, 2013
आम आदमी को देखकर ऐसा लग रहा है की उसके सर पर काले बदल तो हैं . लेकिन वो उनके लिए पानी नही बरसा सकते सिवाय पानी को जमीन के नीचे से निकालने के खेर्चे को बढाने के . नेता लोग अपनी नेतागिरी में लगे हुए हैं कोई अपने घर को आगे बढाने में लगा है तो कोई अपने को साबित करने में लगा हिया की हम ये कर देंगे गरीबी दूर भागेगी . कहना तो वो ये भी चाहते हैं की के काले बादल पानी की जगह तेल ही उधेल देंगे . जमीनी स्तर पर कुछ भी न करने की कसम फिर भी अपने को जमीन से जुढ़े हुए नेता समझते हैं और बताते हैं .
Monday, April 8, 2013
जब हम रूबरू हुए दिव्या मल्होत्रा से
1ण् मनोज:- कैसा रहा अब तक की जिन्दगी का सफर?
दिव्या:- अच्छा रहा जो चाहिए मिला परिवार और माता-पिता का प्यार जो
मुझे बहुत जरूरी था।
2ण् मनोज:- कब से दिमाग में ये बात आयी की मीडिया में जाना है?
दिव्या:- 10+2 के बाद मुझे लगा कि मैं मीडिया की ही पढ़ार्इ करूँ लेकिन घर की इजाजत न मिलने से बी0काम के बाद मुझे आना हुआ।
3ण् मनोज:-आर0 जे0 बनने का सपना है आपका क्या कुछ कर रही हैं? इसके
दिव्या:- अभी तो कुछ नहीं पर कोशिश कर रही हँ।
4ण् मनोज:- मीडिया में जाने का इरादा और आर0 जे0 बनना एक अच्छी समझ की जरूरत होनी चाहिए गीत और संगीत तथा गासिप्स की क्या करती है इसके लिए?
दिव्या:- टी0वी0 देखना मुझे पसन्द है और हर तरह के गाने सुनाती हंू और हर तरह के गाने सुनती हूँ, जिसमें एक गाना बेहद खास और मेरे दिल के करीब है जो है तुझसे नाराज नहीं जिन्दगी हैरान हूँ मैं।
5ण् मनोज:- मीडिया में आने का मकसद?
दिव्या:- कुछ अलग और अच्छा करने का सपना है मेरा साथ पैसा नाम कमाकर अपने परिवार को प्राउड फील करवाना चाहती हूँ।
6ण् मनोज:- काफी खमोस रहती हैं क्या कारण है?
दिव्या:- खमोश नहीं रहती पर पहले किसी से बान नहीं करती ओर कोशिश कर रही हूँ कि मैं इन सब चीजों को दूर कर पाऊं।
7ण् मनोज:- मनोज स्कूटी तेज चलाती है आप क्यों? मैं कहाँ तक सही हूँ?
दिव्या:- फार जाय और मजा आता हैं। रफ्तार से खेलना। आप सहीं हैं।
8ण् मनोज:- कितना इत्तेफाक रखती है आज की ताजातरीन घटनाओं से खासकर
एक लड़की होने के नाते क्या लगता ह
दिव्या:-गुस्सा आता है और लड़कियों को लेकर जो फ्रीडम की बात होतीहै उससे समाजका दोगलापन जाहिर होता है। जिस देश में लक्ष्मी, दुर्गा और मदर टरेसा जैसी सित्रयों को देवी माना जाता है वहां ऐसे घाटिया कांड की उम्मीद नहीं थी।
9ण् मनोज:- जिन्दगी जीने की कैसी तमन्ना है?
दिव्या:- अपनी शर्तों पर।
10ण् मनोज:-कौन है आपका आइडियल ? सिंद्वात क्या है?
दिव्या:-मेरी मां और मै थोड़ी जिददी हूँ और मेरे अपने नियम है।
11ण् मनोज:- क्लासमें दिव्या सूरी से आपकी बहुत पटती है क्या खास है इस दोस्ती में?
दिव्या:- हम दोनों का नाम सेम है और सोच भी मिलती है एक दूसरे से साथ ही विश्वास भी है। मुझे उसकी बात करने की स्टाइल बहुत पसन्द है।
12ण् मनोज:- रियल लाइफ और सपनों की दुनिया में क्या फर्क रखती है या दिव्या:- सपने-सपने होते हैं लेकिन सपने मोटिवेट करते हैं हमें कि हम अपनी जिन्दगी कुछ ऐसा करें जिससे खुद को प्राउड हो साथ ही अपनी जिन्दगी भी हसीन हो।
13ण् मनोज:- फेवरेट एक्टर एक्टे्रस?
दिव्या:- मैं सिंपलसिटी में विश्वास लेकिन नयी चीजों का विरोध नहीं करती हूँ। जो चल रहा है सही है।
14ण् मनोज:- कौन से शौक हैं जो अभी पूरे नहीं हुए और आपका बड़ा मन है।
दिव्या:- मैं ज्यादा घूमी नहीं हूँ और अभी तक पूरा लखनऊ भी नहीं धूमी हूँ तो मेरा शोक है कि मैं घूमू जितना हो सके मैं घूम लूँ।
मनोज:-धन्यवाद! आपको और आपका भविष्य सुन्दर हो।
Sunday, April 7, 2013
Holi aisa tyohaar hai jise hm khelte hain aur is din hum log kafi rageen ho jate hain. Pr kya asal zindagi me hm rango ko lekr itne rageen hain. Hum baat kr rhe hain rangbhed ka. Kya khoobsurti ke liye hume gore aur kale rang ki baat krne ki jaroorat hai? Hamare desh aur samaaj me ye ranghbhed bhi ek bahut badhi samsya hai. Logo ko bahu ya damaad gora chahiye kale logo ko hamesha hasiye pr rkha jata hai. Aur holi khelte vkt bhi hum log laal rang ka hi jyada upyog krte hain ye bhi hamari maansikta ko dershata hai. To hume koshish krni hogi ki rango me bhed na kre aur her rang ke sath khele..
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