सोशल मीडिया और हमारे रिश्ते...
एक जमाना था जब हमारे या तो स्कूली दोस्त होते थे
या मोहल्ले वाले दोस्त होते थे. उनकी संख्या लगभग 4 से 5 होती थी. स्कूल वाले
दोस्त हमारे साथ तब होते थे जब हम क्लास में साथ में पढ़ते थे या फिर इंटरवल में
खेलते थे. मोहल्ले वाले दोस्त जो होते थे उनके साथ तो तितलियाँ पकड़ना लुकाछिपी
खेलना और गर्मी की छुट्टियों में साथ में आम खाना और दिन भर धमा चौकड़ी में हम लगे
रहते थे. ऐसे में कभी उनके घर का तो कभी हमारे घर का सीसा भी टूट जाया करता था. अब
क्या है अब भाई सोशल मीडिया का जमाना है. फोटो खींचा फीलिंग, टैगिंग और कैप्शन
दिया और कर दिया स्टेटस अपडेट और जाहिर कर दी दोस्ती. लेकिन क्या ये दोस्ती दिखाने
का सही तरीका है. शायद सबकुछ ठीक है पर वो बात कहाँ नैसेर्गिगता और दिल का जुड़ाव
शायद ही नजर आता है. हिन्दुस्तान की एक खबर के मुताबिक सोशल मीडिया के रिश्ते महज
एक दिखावा है लोग सिर्फ दिखावा करते हैं. जो लोग अपने दोस्तों के तस्वीरों को अपनी
प्रोफाइल पर शेयर करते हैं, उसमे भी प्राकृतिकता नही होती है. शोध के अनुसार टैग
करना, लाइक करना और कमेंट करना ये बनावटी ज्यादा और सच कम होता है. लोग दिल से इसे
एक्सेप्ट नही कर पाते हैं पर जब उन्हें कोई टैग कर देता है और बेस्ट बडी लिख देता
है तो जैसे जबरदस्ती उनसे लाइक या कमेंट मांग रहा हो. ये बात दोस्ती के साथ साथ
प्यार करने वाले कपल भी करते हैं. यहाँ तक लोग अपने गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड की
तस्वीरे भी दिखावे की खातिर पोस्ट करते जिससे उनके गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड को ये
यकीन रहे की वो उन्हें बेहद प्यार करते हैं. जहाँ तक मुझे लगता है तो ये शोध एक हद
तक ये बात सही साबित करती है. मैंने ऐसे कई लोगों को जनता हूँ जो ऐसा करते हैं वो
फेसबुक पर बहुत ही लंगोटिया यार हैं लेकिन अंतर्मन से एक दुसरे को बिलकुल भी पसंद
नही करते हैं. मैंने तो कईयों को ये कहते भी सुना है की मुझे यार उसको टैग, कमेंट
और लाइक सिर्फ दुनिया को दिखाने की खातिर करना पड़ता है. इसका प्रभाव भी आपको कई
बार देखने को मिल जायेगा जब आप अपने किसी दोस्त को टैग करेंगे और किसी को नही
करेंगे तो वो वर्चुअल दुनिया की ये खुन्नस रियल दुनिया में निकलने लगता है. एक खास
फीलिंग लाने के लिए हमे अपने दोस्तों के साथ ये दिखावा करना पड़ता है. लोग फेसबुक
पर इन सारी चीजों को नोटिस करते हैं रहते हैं. जो हमारे दोस्ती बनने और बिगड़ने में
एक महती भूमिका ऐडा करता है. फेसबुक से भी हमे कई लोगों की दोस्ती की हद का पता
लगा सकते हैं और लगाते भी रहते हैं. बहुत लोग तो ये भी कहते आपको मिल जायेंगे की
आजकल तुम उसकी फोटो पर बहुत कमेंट और लाइक दाग रहे हो. ऐसे ही तमाम वाकये को समेटे
ये वर्चुअल दुनिया दोस्ती के मायने को प्रभावित करती है. आशा आप टैग, लाइक और
कमेंट के मोहताज़ न होकर अपने रिश्ते को बेहतर बनाते रहेंगे और उसमे फीलिंग बरकरार
रखेंगे.....
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