Sunday, June 1, 2014


सारा आम तो कैटरीना ले गयी ।।।।।।


जून शुरू होने को है और इसबार एक भी दशेहरी आम अब तक खाने को नहीं मिला है। फलों का राजा आम जो हर आम और खास की हथेली तक पहुंचता है। लेकिन अभी इसका सभी को इन्तजार है। पता नहीं कहां है वो मलिहाबादी जो अभी तक हमारे शहर नहीं पहुंचा है। बड़ी उम्मीद है इस बार भी हर बार की तरह कि जब तुम आओगे तो गर्मी घटाओगे। अभी तो खासा हरे हो खट्टे भी हो, लेकिन जब तुम्हारा रंग हल्का पीला और लाल होने लगता है और तुम मीठे हो जाते हो। तो तुमको देखकर मुंह में सिर्फ पानी आता है, डाल की तोड़ी हुई दशहरी जब बाल्टी भर पानी में डालकर हम आम आदमी खाना शुरू करते हैं तो उसका मजा ही कुछ और है। वो दिन आज भी बहुत याद आते हैं जब बैरिस्टर साहब के साढ़े तीन सौ बीघे वाले बाग में हम आम चुराने जाया करते थे। हमारे श्रावस्ती में ये सबसे बड़ी बाग है। वैसे बाग तो हमारे यहां भी हैं , लेकिन देशी आम की और हमें उस वक्त चस्का दशहरी का। वैसे आम तो आजकल हर जगह आपको बोतलों में मिल जायेगा।





स्लाइस, माजा, फ्रुटी और तमाम ऐसे पेय पदार्थ जो ये दावा करते हैं कि हम आपको हर मौसम में आम की कमी नहीं खलने देंगे। लेकिन क्या ऐसा सम्भव है , मेरे हिसाब से बिल्कुल नहीं वो स्वाद कहां बोतल वाले आम में। शाहरूख से लेकर सनी देओल तक बोतल वाले आम का प्रचार करने में लगे हैं और मेरे लिखने की वजह बनीं कैटरीना जो आम का आमसूत्र भी बता रहीं हैं। वाक्या ये हुआ मैंगो शेक मांगने पर जब सामने से आम के न होने का जवाब आता है, तो मेरा क्यों ? शायद मेरे हिसाब से लाजिमी भी था। तो जवाब मिलता है कि सारा आम कैटरीना ले गयी। शायद उसका जवाब उम्दा था। आमसूत्र यूं ही नहीं कैटरीना ने पेश कर दिया है। वैसे छोडि़ए आमसूत्र वाली कैटरीना को और याद करिए जरा अमेरिका वाली कैटरीना को जिसकी वजह से भारी तबाही मची थी। दो दिन पहले वाली आंधी ने आम और आम जन को काफी नुकसान पहुंचाया दोनों आम जमीन पर आ गये। तो कैटरीना कोई भी हो लेकर वो आम को ही जाती है। चाहे वो पेड़ वाला आम हो या फिर आम अवाम हो। कैटरीना की अदा ही खतरनाक है। तो होशियार रहें कैटरीना से।



आम की फोटो इंटरनेट से ली गयी हैं। 









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