Monday, October 13, 2014

एक तरफ पाकिस्तान की फायरिंग दूसरी तरफ ओमान का हुदहुद



हॉकी की हार से परेशां पाकिस्तान ने सीमा पर गोली पे गोली दे डाली. परेशानी ज्यादा बड़ती देख भारतीय फ़ौज ने जैसा की विदित है मुहंतोड़ जवाब दिया. पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ का इसमें कोई दोष नही क्यूंकि उनकी आजकल चल नही रही है. नवाज़ भी नही चाहते हैं हमारे मुल्क से उनके मुल्क का बैर हो. क्यूंकि उन्हें पता शेर एक कदम अगर पीछे गया तो वो और खतरनाक आक्रमण करेगा. भारत मंगल पर पहुँचने का जश्न मना रहा है. तो पाकिस्तान उस पड़ोसी की भूमिका में पूरी तरह से फिट बैठ रहा है जो न तो खेलता है और न ही खेलते हुए देख सकता है. हालाँकि वहां की आम अवाम ये विचार नही रखती है. क्यूंकि चाहे भारत हो या पाकिस्तान गरीब पहले पेट भरने की सोचता है. गौरतलब है कि आतंकियों ने भी इस गरीबी का फायदा उठाया है. जो वहां के नौजवानों को बरगलाने में कामयाब रहे हैं. एक खास मुलाक़ात में वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार हफीज चाचर ने पाकिस्तान की गरीबी को वहां के आतंकवादी कैम्पों के रौनक बढ़ाने वाला बताया था. उन्होंने ही पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त को लेकर एक बेहद दिलचस्प बात बताई थी की ये प्रान्त आजादी के वक्त पाकिस्तान का अंग नही था. जिसे बाद में पाकिस्तान ने जबरदस्ती संगीनों के साये में अपना प्रान्त बना लिया. बलोच वर्ग एक व्यापारी वर्ग माना जाता था. जैसे हमारे भारत में मारवाड़ी वर्ग. लेकिन आज की डेट में लगभग 2000 बलोच गायब हैं जिनका कोई अता पता नही है. ये वो बलोच हैं जो अलग बलूचिस्तान की मांग कर रहे थे. एक ज़माने में सबसे धनी वर्ग के ये लोग आज पाकिस्तान में सबसे गरीब हैं. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को जगमग करने में भारत अगर मदद न करे तो शायद ही वहां रात में उजाला हो. पोलियो उन्मूलन में पाकिस्तान की अपनी धार्मिक कट्टरत्ता जग जाहिर है. अमेरिका और दुनिया से आने वाला ऐड रोटी, कपड़ा और मकान से इतर भारत की शांति कैसे छीनी जाये उसमे खर्च हो जाता है. पाकिस्तान के बजट का 60 फीसदी सेना अपने विकास में लगाती है. हर बड़े सेना के अधिकारी अपना दूसरा घर गल्फ अथवा यूरोप देशों में रिटायरमेंट के बाद का जीवन जीने के लिए बनाये रखते हैं. रही बात भारत पर फायरिंग करने की तो ये मात्र उकसावा है. जैसे हमारे देश में बेनी वर्मा, दिग्य्विजय सिंह, ओवैसी, प्रवीण तोगड़िया और तमाम बड़ बोले नेता बेमतलब कुछ भी बोल देते हैं. जिसका वास्तविकता से कोई वास्ता नही होता है. बस इसे मीडिया अटेंशन कह सकते हैं. तो पाकिस्तान का मुख्य उद्देश्य है कश्मीर पर रार जिसकी वजह से वो पूरी दुनिया और मीडिया में अपनी पहचान बनाये रखे. अब देखा जाये तो सीजफायर का उल्लंघन करने का पाकिस्तान का इस समय एक कहावत को सच करता है. हमारे गाँव में लोग कहते हैं की सरतारी बनिया बाँट ही तौलता रहता है. उसके पास कोई काम ही नही है जिसमे वो व्यस्त हो सके. अपने घर में भी वो बम दागते रहते हैं. कभी कभी अमेरिकी ड्रोन से दो चार हो लेते हैं. यूएन में भी बे भाव वापस आ गये. कहीं न कहीं पाकिस्तान विश्व पटल पर अपनी गम्भीरता खो रहा है. वहीं भारत पीएम मोदी की अगुवाई में विकास प्रक्रिया में लगा हुआ है. अब पाकिस्तान का दिमाग शैतानी हो गया है. क्यूंकि वो पूरी तरह से खाली है. इधर मंगलयान भेज भारत दुनिया में अपनी उपस्थिति का कद और ऊँचा कर रहा है. असम और कश्मीर में आई बाढ़ से सफलता पूर्वक निपटने के बाद भारत का सामना भयंकर तूफ़ान हुदहुद से हो रहा जिसमे भी भारत ने डेढ़ लाख लोगों के विस्थापन को सहजता से अंजाम दिया. जो अपने आप में भारत की ताक़त अंदाजा लगाने को काफी है. पिछले साल फेलिन और केदारनाथ में भी भारत के जाबांजों ने अपना उत्कर्ष पेश किया था. ओमान से चले हुदहुद ने नुक्सान तो किया है पर शायद डेढ़ लाख लोगों की जान से ज्यादा नही.   

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