Friday, April 18, 2014

वक्त की आंधी नही बचा आम ....

आज सुबह जब पिता जी से बात हो रही थी तो उन्होंने मौसम की बदतमीजी को कोसते हुए कहा की आंधी की वजह से इसबार आम की बागको बड़ा ही नुक्सान हुआ .. लगभग आधे फल जमीन पर आ गये हैं .. जो अभी काफी छोटे हैं जिनका कुछ नही बन सकता है .. आम की जब बात आती है तो खास पर गुस्सा आती है .. क्यूंकि आम ही ऐसा फल है जिसे हर आदमी आसानी से पाता और खाताहै .. वैसे शहर में भी काफी नुक्सान हुआ जितनी होअर्दिंग्स थी सबके सब चौपट हो चुकी हैं . पर ये सब सुबह के अख़बारों की सुर्खिया थी और मेरे आम को कोई फुटेज ही न मिली .. मलीहाबाद जो आम के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है .. वहां की भी कोई खबर न ली गयी .. खैर , आम आदमी पार्टी की तरह आम भी खबरों जगह कम पायेगा . क्यूंकि बीजेपी और कांग्रेस है न पन्ना भरने के लिए .. कोई टॉफी दे रहा है देश को तो कोई ट्राफी दिलाने के सपने दिखा रहा है .. देश की दोनों पार्टियाँ जो सबसे बढ़ी हैं उन्होंने आजतक कोई ऐसा मॉडल नही पेश किया जो देश की गरीबी और बेरोजगारी का तोड़ हो .. डिबेट चल रही रैली हो रही है दो चार गाँव एक रैली के खर्चे में बदल सकते हैं लेकिन भासन देना ज्यादा जरूरी सिवाय काम करने के .. जनसमस्या समझने एक गली से जब हम गुजरे तो लोग वोट देने की बात पर कुछ कंफ्यूज से दिखे उन्हें वोट देना है लेकिन किसे दे क्यूंकि सारे उम्मीदवार  एक जैसे हैं ... पहले प्रचार करने लोग जाते थे अब वो भी नही जाते है .. गरीब आदमी को काम से फुर्सत नही है क्यूंकि वो नही करेगा तो शाम में खायेगा क्या .. तो वो देश में किसकी लहर है उसी में बहने को तैयार है पर उसे ये पता है लोग वोट लेकर उसे किनारे लगा देंगे .. जो सरकारी सुविधाएँ हैं उनको पाने में भी उन्हें 100 से 200 रूपये तक देने पड़ जाते हैं ... एक खास बात ये भी पता चली की ऐसी सुविधाएँ भी खास के खासों को ही मिलती हैं ... 

Wednesday, April 16, 2014

मैं किसान का बेटा हूँ .......


गेहूं की फसल अपने चरम है, पूरी धरती सोना हो गयी है, बालियाँ की खनक ऐसी है मानो कोई कमसिन सुंदर लड़की की खनकती हंसी हो.... पूरे गावं में ख़ुशी सा माहौल है पंशुओं में भी लहर दौड़ पड़ी है क्यूंकि अभी तक वो किसी एक जगह बंधे रहते थे लेकी अब उन्हें खली खेतों में चरने का मौका मिलेगा साथ ही उनका प्रिय आहार भूसा भी मिलना शुरू हो जायेगा .... ये वही मौसम है जब किसान मस्त होकर अपने काम में लग जाता है ... उसे बहुत सारा काम करना होता है, लेकिन चैत की सुबह और शाम में हवा के मध्धम झोके में आल्हा गेट हुए वो अपने सरे काम निपटाताजाता है ... दूर खेतों से जब वो अपने सर पर गेहूं का बोझ लाकर रखता है और लुगाई उसे निहारते हुए एक हाथ में गुढ़ और एक हाथ में लोटे में नल से निकाला गया ठंडा पानी लिए खड़ी होती है ....जिसे पीकर किसान अपने काम में फिर पूरे मन से लग जाता है ... पढने वाले बच्चे भी गर्मी की छुट्टी के मौके में  अपने पिता के कामो में हाथ बंटाते हैं ...कहते हैं इस मौसम दुधारू पशुओं का दूध बढ़ा ही स्वादिष्ट होता है ... आम आदमी को एक मात्र खाने को मिलने वाला फल आम भी इसी मौसम में तैयार हो रहा होता है .. बागों में चहल पहल बढ़ जाती है .. कोई पेड़ पर चढ़ कर , तो कोई लग्गियों और लबेदों से आम का शिकार करता है .. आम आम पर वार करता है ... ये कहानी हर साल चैत में घटित होती है , पर इसबार इसमें मसाला लगा है वो भी काफी गर्म और चोख ... चुनाव २०१४ की सरगर्मी चारो तरफ राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो चली खेतों में ही फैसले हो रहे हैं किसे वोट देना है .. महंगाई , गरीबी , बेरोजगारी और बढ़ते  डीजल के मूल्य मुख्य मुद्दे हैं ... जो पार्टी इन मुद्दों को ध्यान में रखे हुए है या इन्हें कम करने की बात कर रही है.. वो उसी को वोट देने की बात करते हुए अगला बोझा उठा लेते हैं और गाते हुए खलिहान की तरफ कदम बड़ा देते हैं .... 

Monday, April 14, 2014

तेरे साथ जो बिताया पल है ,
खुद को भूला तुमको जिया है,
तुम्हारे लिए लम्हे होंगे वो ,
मैंने तो सदियाँ समझा है ,
बारिश गवाह है ,
तो  धूल और धूप तुम कैसे भूलोगी ,
ठंडक की ठण्ड हवा हमारी यादों को ठंडा नही कर सकती,
क्यूंकि आने वाली हवाएं गर्म हैं ,
जो हमारे रिश्ते में गर्माहट भर देंगी।  

Sunday, April 13, 2014

मैं काफी  दिनों से ये सोच  रहा हूँ की ब्लॉग  पर  कुछ लिखा  जाये, लेकिन संसाधन की अनुपलब्धता हमारी  लेखनी में रुकावट थी।  लवकिं अब संसाधन है तो कोशिश करूँगा कुछ न कुछ लिखता रहूँगा धन्यवाद।  

Wednesday, March 12, 2014

अ ग्रेट वेडनेसडे।
ज़िन्दगी में समय कि रफ़्तार को न तो हम बढ़ा सकते हैं और न ही घटाकर अपने मुताबिक कर सकते हैं।  

Sunday, December 15, 2013

वो खूब चिल्लाई गिड़गिड़ाई ,
भीड़ थी मगर किसी को न दी सुनाई,
दरिंदो कि दरिंदगी ने नया कीर्तिमान बनाया ,
जो होती थी गाली उसे करके दिखाया ,
क्यूंकि वो बेटी थी ,
रात में निकली थी ,
उसे छुप के रहना चाहिए था ,
कुछ लोगो का तो ये भी तर्क था ,
बाद में लोगो ने इसे खुद पर समझा ,
माँ बेटियों ने मिलकर हल्ला मचाया।,
तो देश ही नही पूरी दुनिया में ,
ये आवाज दी सुनायी ,
हम वीरांगनाएं नही सहेंगे जुल्म तेरा ,
जरूरत पढ़ी तो बदलेंगे चोला।
देश कि बेटियों और निर्भया को समर्पित , आशा है ऐसी घटना अब न हो।

Friday, December 13, 2013

दो नयनो कि आपसदारी

दो नयनो कि आपसदारी ,
कुछ लोगों ने दीन्ह बिगारी ,
कोई बोले नीर यहाँ था ,
कोई बोले पीर यहाँ था,
इतने में हो गयी लातमारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।
होत भोर जब बांग वो सुनते,
संध्या वंदन जब वो करते ,
चंदा संग भरते किलकारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।
रंग कुर्ते में भेद न करते ,
मन ही मन में खूब उछलते ,
एक दूजे के बने हितकारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।
शादी , उत्सव इन बिन सूना ,
विष्फोटक केर दें ये दूना ,
फिर क्यूँ फैली ये चिंगारी,
दो नयनो कि आपसदारी।
गावों में तो बनी बनी है ,
शहरो में तो गंध मची है ,
पढ़े लिखे हैं बने वैभिचारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।
अपना छोटा सा अभियान ,
सब ईशो को दें सम्मान ,
बन बैठो अपने अधिकारी ,
दो नयनो कि आपसदारी।