Friday, May 2, 2014

बाटी - चोखा

लखनऊ का तापमान आजकल 43 डिग्री सेल्सिउस छु रहा है मानो पूरा शहर गर्म तवा हो गया है , इस भीषण गर्मी में हमे बाहर के खाने पर ही जीवन यापन करना होता है क्यूंकि परिवार के लोग शादी – विवाह में गाँव गये हुए हैं ... तो अकेले खाना इस मौसम में बनाना समझिये डबल तवे का इन्तेजाम करना हुआ . साथ ही आजकल परीक्षा की वजह से खाना बाहर खा लेना ज्यादा सही रहता है .. लेकिन ये खाने सिर्फ पेट भरने के लिए होते हैं और ऐसा नही हम अकेले बाहर खाते हैं हमारे जैसे बहुत सारे मित्र इन होटलों का चक्कर मारते है क्यूंकि उनकी मजबूरी हमारे जैसी ही है ..  ऐसे में एक ऐसा खाना जो हमे शुद्धता से मिलता है और हमारी धरती की खुशबू भी उसमे निहित होती है , वो है बाटी चोखा ... बाटी चोखा ऐसा नही सिर्फ पूर्वांचल में ही प्रसिद्ध है ये हमारे देवीपाटन मंडल में भी बहुत ही प्रसिद्ध है और सत्तू के बाद बाटी चोखा सबसे बेहतरीन खानों में आता है .. ये काफी शुद्ध और पेट भराऊ भी होता है .. लखनऊ में तो इसका हर जगह चलन है और अब तो ये काफी फेमस हो चला है .. कुछ तो पूर्वांचल के लोगों ने तो इसको अपना बिज़नस भी बना लिया है जैसे बागी बलिया बात चोखा नाम से एक मोबाइल पिच्कुप जो जगह जगह जाकर बाटी चोखा बेचता है और एक ब्रांड बनकर उभरा है .. लेकिन ज्यादा अपने मोहल्ले वालेदूकान से ही खाए हैं और मुगे उसका ज्यादा अच्छा भी लगता वनस्पति के बागी बलिया वाले से .. मेरी वजह कुछ मेरे ख़ास दोस्त भी जो कभी इसकी तरफ हेय दृष्टि से देखते आज बढे चाव से खाते हैं .. कुछ मुझसे मंगाते हैं तो कुछ साथ में आकर खाते हैं .. बाटी चोखा बनाना आसान काम नही इसमें आग के किनारे बहुत तपना पढता है , आटे की लोई में सत्तू भरकर पहले सारी बाटी बना लेते हैं, चोखे के लिए आलू , टमाटर और बैंगन को भून कर मिर्च नमक डालकर फेंट लेते हैं .. और आग को एक बढ़ी सी कढाई में तैयार शायद ये सबसे मुश्किल काम होता है .. गोबर के उपले से तैयार आग में फिर डाल देते हैं और फिर तैयार हो जाती है लाल लाल बाटी .. ये सब लगभग २ से ३ घंटे का काम है .. लेकिन जब हम बाटी के साथ गन्ने का जूस खाते और पीते हैं , तो इस गर्मी को ये दोनों मिलकर काफी हद तक दूर कर  देते हैं ... ये दोनों चीजे मसाले से दूर होती हिं जो गर्मी से तो बचाती ही हैं साथ ही साथ हमे ताजगी का एहसास भी कराती हैं ... तो आप कब खा रहे हैं ...

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