Wednesday, May 14, 2014

आप फिर धोखा खा जायेंगे जब नोचकर आपका जिस्म वो आगे बढ़ जायेंगे ,
तन – मन में अथाह  दर्द होगा  समुद्र की गहराई जैसा आभास होगा ,
इसबार मौत पक्की है जीवन से मुक्ति पक्की है ,
क्या तुम तैयार हो मरने के लिए अगर हाँ तो कूद पड़ो ,
मैं नही रोकता तुम्हे क्यूंकि तुम्हे अब मर ही जाना चाहिए ,
तुम्हे धोखा और प्यार का फ़र्क नही पता तुम सिर्फ भटकती हो ,
सिर्फ अपने मन का ही नही होता इस दुनिया में कुछ प्रकृति का असर जरूर होता है ,
तुम कितना भी बनाओ रेत का महल तेज हवा उसे उड़ा ही ले जाएगी ,
वक्त से पहले और कर्म से ज्यादा न मिला है किसी को न मिलेगा तुम्ही को ,
हाँ अगर जीना है तुम्हे तो छोड़ो बीती को और मानो की अच्छा ही हुआ ,
जो हुआ उसे भूलकर अपनी ताक़त बना लो उसे जीतकर ,
जो है पास में जो है साथ में न समझो उसे वो बेकार है ,
क्यूंकि कभी तुमने सोचा नही उसे कभी गौर से देखा तक नही,
समझा हमेशा बड़ा सस्ता है ये  हरवक्त साथ में बना रहता है,
बस भूल कर दी कम बोली लगाकर गच्चा खा गयी महंगा खरीदकर,
पैकेजिंग अच्छी किसी चीज के अच्छे होने की गारंटी नही होते ,
गहराई से सोचने पर अक्सर फैसले गलत साबित होते हैं ,
मगर समझ गहरी होने से हम गलत फैसलों को सही साबित कर सकते हैं ,

सही वक्त सही चोट मार कर देखो तो सही बंजर भी पानी उगल देगी ........     

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