Sunday, May 18, 2014

आखिरी भेंट..........


कहते हैं समय रुकता नही है और कुछ भी हो जाये कभी रिवाइंड नही होता है , कब क्या हो जाये इसका कोई ठिकाना भी नही है वक्त अपनी रफ़्तार से चलता रहता है और हमे जीवन में पीछे का कुछ भी सही करने का मौका नही देता है.. बचपन के बाद जवानी और बुढ़ापा अपने तय वक्त पर जरूर आते  हैं .. ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत वक्त माना जाता है वो है छात्र जीवन और जब ये अपने चरम पर हमारा साथ छोड़ता है तो मानो हम सबकुछ गंवा रहे होते है, कैंटीन,डिपार्टमेंट की सीढ़ी, यूनिवर्सिटी कैंपस की हर वो चीज़ पेड़ ,वाटर कूलर ,स्टाफ  और  क्लास की सीट वो चाहे आगे हम बैठते हो या पीछे हमारा उससे भी रिश्ता बन चूका होता है सही मायने प्यार हो जाता है हमे उन सारी चीजों जिनसे हम रोजाना रूबरू होते हैं .. अच्छा इन सब में सबसे महत्वपूर्ण हमारे टीचर और छात्र मित्र होते है , और उनसे प्यार, नफरत और कम्पटीशन सब होता है ... लेकिन जब हम एक दुसरे से जुदा हो रहे होते हैं तब सिर्फ उन्हें हम मिस कर  रहे होते हैं  न हमे उनसे कोई शिकवा होता है न ही कोई गिला दिल में वो जगह बना चुके होते हैं और हम उन्हें खोना नही चाहते हैं लेकिन वक्त की इजाजत नही है की अब हम और ज्यादा एक दुसरे के साथ बिता सके ... एक नवीन परिवार जिसे हम २ साल में बनाते हैं उसे बिखरता देख आँखों में आंसू भले न आये

 लेकिन दिल में जैसे व्याकुलता फ़ैल जाती  है , मीठा दर्द जिसे सिर्फ अंदर दबा देना है ...  
थे गिले बहुत , थी शिकायत बहुत , थी नफरत मन में तुझको लेकर बहुत ....
पर आज क्या ये हुआ जब तू जा रहा है , तो मोहब्बत जाग उठी है ....



अब शायद हम मिले हो सकता है  मिले तो टुकडो में मिले ऐसे कभी मिलना नही होगा जिस तरह हम साथ में मिलते थे चाहे वो मजबूरी रहती थी की हमे कॉलेज जाना है ... अब सबकी मंजिल अलग अलग है , हर कोई अब जीवन के उस संघर्ष जा पहुंचा जहाँ से हमारी दुनिया बदल चुकी होगी हम नौकरी , घर –परिवार इत्यादि चीजों वयस्त हो जायेंगे ... रह जायंगी तो सिर्फ यादें जिन्हें हम सिर्फ दिलों में समेटते फिरेंगे ... खूबसूरत जीवन हो , नये पथ में नयापन हो , खुल जायें वो रास्ते जिनके लिए घर से निकले तुम ...... शुभकामनाएँ...... 


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