गाँव कनेक्शन .....
भारत एक विकासशील देश जिसकी ७० फीसदी आबादी अभी
भी गांवों में रहती है . जहाँ सुबह मुर्गे की बांग से होती है , तो दोपहर पेड़ों की
छाँव में बीतती है और शाम ठंडी हवा और
जुगनू की रौशनी से होती है . गावं में
रहने वाले ज्यादातर लोग खेती किसानी का काम करते है. यहाँ लोग अपने सपने की
जुताई करते हैं , बीज उस सपने का आधार होता है , तो खाद और पानी उसकी जान होते हैं
. निराई – गुड़ाई और रखरखाव एक किसान की मोहब्बत होती है जो उसे लगातार अपने फ़सल
से जोड़े रखता है . ये सपना और प्यार अपने अंजाम पर पहुँचता है , जब हरी भरी फसल
लहलहा उठती है और किसान झूम उठता है .तो ये बात थी एक ग्रामीण के सपने की . अब हम
बात करते हैं गाँव की . खेत , तालाब, फसल , पशु –पक्षी जैसे गाय-भैंस ,हल ,कुदाल ,
ट्रेक्टर और हरे भरे पेड़ – पौधे मिलकर बना कुनबा गाँव कहलाता है .. यूँ तो दुनिया
के लगभग हर देश में गाँव होते होंगे , लेकिन गांवों का देश भारत है . चिड़ियों की
चहचाहट ,ठंडी हवा की छुवन, ताज़े फल और सब्जियां , गाय – भैंस का ताज़ा दूध , मोर की
तान पर बारिश की उम्मीद , बिरहा गाता हुआ किसान जब अपने खेत में काट रहा होता है
धान और वहीं खेत में उसकी पत्नी उसके लिए गुड़ और लोटा भर पानी लेकर जाती है तो समझो ये
गाँव का दृश्य है . ठंडियों में अलाव के किनारे जब महफ़िल सज जाये और अपनी – अपनी
फसलों और पशुओं का बखान छिड़ जाये तो समझो ये गाँव की चौपाल है . चैत की दोपहरी जब
बरगद या किसी बाग़ में बीते तो समझिये आप गाँव में हैं . तो ये रही गाँव की बात ,
स्वाभिमान , मेहनत और सम्मान हमारे देश के किसानो की खूबियाँ हैं और वो इससे कभी
समझौता नही करता है .
बात जब लोकतंत्र की आती है तो ये लोग इसमें भी
बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं . देश के किसी भी चुनाव में सबसे ज्यादा वोट पोल होता है
तो वो ग्रामीण भारत से होता है , शहर के लोग उस दिन छुट्टी मनाते हैं और इनके लिए
ये दिन किसी पर्व से कम नही होता है .पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर
शास्त्री का नारा भी था जय जवान जय जय किसान , जो आज भी सार्थक है .. तो भारत बसता
है गांवों में और हम जितने भारतवासी हैं कहीं न कहीं गांवों से जुड़े हैं , तो हम
सबका बनता है गाँव कनेक्शन .....
मनोज तिवारी
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