Thursday, May 8, 2014

मिट्टी का घड़ा प्राकृतिक फ्रिज

जैसे – जैसे गर्मी बढती जाएगी हमारी प्यास बढती जाएगी , और हम पानी पल –पल पीने लगते हैं. जहाँ हम पानी को ठंडा करने के लिए उसमे बर्फ और फ्रिज का इस्तेमाल करते हैं , पर शायद इनके द्वारा ठंडा किया हुआ पानी हमारा प्यास नही बुझा पाता है क्यूंकि बर्फ तह्शीर गर्म होती है . जिसकी वजह से हमारी प्यास जस की तस  बनी रहती है . लेकिन बर्फ या तो पहाड़ो पर है या फिर जहाँ बिजली  की उचित व्यवस्था है . फ्रिज तो पूरी तरह बिजली वालो की खातिर है . अब बात किया जाये अगर जिनके पास न बर्फ को खरीदने का पैसा है या न फ्रिज खरीदने का और अगर हो भी तो बिजली अगर नही है तो वो क्या करे ? तो वो खरीदे एक प्राकृतिक फ्रिज जिससे प्यास भी बुझेगी और बिजली भी बचेगी देश का सबसे पुराना देशी नुस्खा मिट्टी का घड़ा , इसका पानी भी महकता है साथ ही साथ प्यास को भी खत्म करता है लेकिन लोग इसे अपने स्टेटस से जब जोड़ लेते हैं तो इसकी सार्थकता कम हो जाती है . अभी एक दोस्त को कल जब बिसलेरी की ठंडी बोतल थमाया तो उसने कहा की ये पानी तो ठंडा है पर इससे प्यास नही बुझती . फिर उसने भी घड़े की तारीफ की थी , वाकई में घड़े का पानी प्यास बुझाता है ये सॉफ्ट ड्रिंक वगैरह सब बकवास हैं और ये सिर्फ अपने प्रचारक की प्यास बुझाते हैं . हालाँकि मैं यहाँ किसी को न तो इसे पीने को मना क्र रहा हूँ और न खुद कसम खा रहा हूँ की आज से मैं इसे नही पियूँगा . रही बात घड़े की बचपन से ही मैं इसका पानी पीता आया हूँ , हमारी दादी हर साल अपनी चारों बहुओं के लिए एक – एक घड़ा खरीद लेती थी और इसके पैसा नही अनाज देना होता था  .दादी की समकक्ष  पीढ़ी के बाद हम लोगो के समकक्ष की पीढ़ी ने इस काम को लगभग अब  बंद कर  दिया है .. शायद ये काम अब उतना उन्हें आर्थिक सहयोग नही पहुंचा सकता जितनी उन्हें जरुरत है.. लेकिन घड़े की लोकप्रियता आज भी है और अब ये शहरों या छोटे कस्बों में ठेले या फूटपाथ पर मिल जाता है .. अब अनाज नही इसके बदले पैसा देना होता है फ़र्क इतना सा हो गया है .. शहरों में घड़े आजकल हॉस्टल या रूम लेकर रहने वाले  बाहरी लड़के और स्लुम्स में रहने वाले  खूब खरीदते है . ये उनके लिए फ्रिज का काम करता है ...   तो आप कब ले  रहे हैं ये प्राकृतिक फ्रिज जो सिर्फ आपके घर एक कोना लेगा और चुपचाप आपका प्यास बुझाता रहेगा बिजली हो या न हो .... 

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